USB (Universal Serial Bus
) कंप्यूटर को दुसरे बाहरी यंत्रो से जोड़ने के
लिए सबसे ज्यादा सहायक कनेक्शन है. बाहरी यंत्र जैसेकि डिजिटल कैमरा, प्रिंटर,
स्कैनर या फिर अन्य बाहरी हार्ड ड्राइव. इसके इस्तेमाल से आप अपने डाटा को हर
सेकंड 12 Mb की गति से एक जगह से दूसरी जगह भेज सकते हो. 1996 में कुछ कंप्यूटर
बनाने वाली कंपनियो ने USB की शुरुआत की थी और आजकल हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ USB केबल भी आती है
ताकि उसको आपके कंप्यूटर के साथ आसानी से जोड़ा जा सके. ये एक पिन की तरह दिखता है.
अगर आप इसे कंप्यूटर से जोड़ना चाहते है तो आपको इसे अपने कंप्यूटर के USB पोर्ट से जोड़न
होगा, जो आपको अपने कंप्यूटर के CPU के आगे और पीछे मिलते है. USB एक ऐसी टेक्नोलॉजी के
हिसाब से बना है जिसमे आप इसे आसानी से कंप्यूटर के साथ जोड़ और हटा सकते हो, इसके
लिए आपको बार बार कंप्यूटर को बंद या ऑन नही करना पड़ता.
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| Explain the USB Port Function |
USB PORT:
आपके कंप्यूटर में USB को लगने के लिए दी
गई जगह को USB PORT कहा जाता है. आजकल हर कंप्यूटर USB PORT के साथ आता है ताकि आप इसके जरिये अपने कंप्यूटर के साथ कुछ बाहरी डिवाइस को
जोड़ कर उनका इस्तेमाल कर सको. कंप्यूटर ऑपरेटर भी आपके USB को सपोर्ट करता है,
और इसी वजह से आपके कंप्यूटर में कोई नही इंस्टालेशन आसानी से और जल्दी हो जाती
है. इसके साथ ही आप इसे विंडो 98 या उसके बाद आई किसी भी विंडो में इस्तेमाल कर
सकते हो. कंप्यूटर को बाहरी यंत्रो से जोड़ने वाले पुराने तरीके कंप्यूटर के लिए एक
तरह से सिर दर्द का काम करते थे लेकिन USB पोर्ट के जरिये कंप्यूटर
से जुड़ना बहुत ही आसान होता है.
USB के 2 version होते है.
- USB 1.0 – ये ज्यादातर सिर्फ कीबोर्ड
और माउस को जोड़ने के लिए इस्तेमाल होता है और ये 11 Mbps की गति पर काम करता
है.
- USB 2.0 – ये USB का नया version है और आप इससे किसी भी बाहरी यंत्र को जोड़ सकते हो जो USB पोर्ट को सपोर्ट
करता हो. 480 Mbps की गति से काम करता है. इसीलिए पिछले लगभग तीन सालो से हर
कंप्यूटर में इस नए version का ही इस्तेमाल होता है.
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| USB Port Kaise Kaam Karta hai |
USB कनेक्टर 3 तरह के आते है
1.
टाइप 1 – ये फ्लैट
होते है और ये बाकी कनेक्टर से थोड़े बड़े होते है, इन्ही को कंप्यूटर के साथ फाइल
लेने या देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इनके जरिये आप कीबोर्ड, माउस,
पैनड्राइव, अपना मोबाइल फ़ोन इत्यादि जोड़ सकते हो.
2.
टाइप 2 – ये चकोरकार
के होते है और थोड़े बड़े भी होते है, इस तरह के कनेक्टर ज्यादातर स्कैनर, प्रिंटर
या फिर हार्ड ड्राइव्स के पाते है जिनके जरिये ये कंप्यूटर के साथ जुड़ते है.
3.
टाइप 3 – ये भी
दिखने में टाइप 2 की ही तरह होते है लेकिन इनका आकार छोटा होता है और इनके जरिये
कैमरा, MP3 प्लेयर और बाकी के छोटे डिवाइस को कंप्यूटर से जोड़ा जाता
है.
USB पोर्ट के प्रकार
जब आप कंप्यूटर CPU के पीछे देखोगे तो
आप पाओगे के वह कई तरह के पोर्ट दिए गये होते है जो कंप्यूटर के हर हिस्से को
जोड़ने में सहायक होते है. वे सब एक दुसरे से अलग अलग होते है. उन्ही में से कुछ
ऐसे पोर्ट होते है जिन्हें Universal Serial
Bus कहा जाता है. ये मुख्यतः 3 प्रकार के पाए जाते
है.
·
Type A – ये USB पोर्ट के वास्तविक रूप के होते है जो फ्लैट और आयताकार के
दिखाई देते है इनमे आप उन सब USB कनेक्शन को लगा सकते हो जो ऊपर टाइप 1 में बताये गये है.
·
Type B – ये बड़े और चोकोर
होते है जिनमे आप अपने प्रिंटर, स्कैनर इत्यादि के USB कनेक्टर को जोड़ते हो.
Type C – इनके द्वारा आप अपने उन डिवाइस के साथ डाटा शेयर कर
सकते हो जो आपके मनोरंजन के काम आते है. जैसेकि कैमरा, MP3 प्लेयर इत्यादि. ये दिखने में टाइप बी की ही तरह होते है लेकिन आकर में उनसे
छोटे होते है.
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